सूरजपुर। जिला मुख्यालय से लगे कई गांवों में लगातार बिजली कटौती से लोगों का सब्र जवाब देने लगा है। नमदगिरी/महगांव सब स्टेशन से सप्लाई होने वाली विद्युत व्यवस्था पिछले सप्ताहभर से पूरी तरह अनियमित बनी हुई है। स्थिति यह है कि हर घंटे दो से तीन बार बिजली कट रही है, और यह सिलसिला सुबह से शाम तक जारी रहता है। कभी 10 मिनट के लिए, कभी 20 मिनट के लिए, तो कभी आधे घंटे के लिए सप्लाई ठप हो जाती है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
रामपुर, रामनगर, रूनियाडीह, सोहागपुर, सरस्वतीपुर, करंजी, खरसुरा, नमदगिरी समेत दर्जनों गांवों में रहने वाले सभी वर्गों के लोग गंभीर रूप से प्रभावित हैं। ऑनलाइन वर्क करने वाले युवा और स्टूडेंट इंटरनेट व बिजली पर निर्भर हैं, लेकिन आंख-मिचौली ने पढ़ाई और कामकाज को पूरी तरह बिगाड़ दिया है. वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इन्वर्टर भी इतने बार की कटौती के सामने जवाब दे चुका है।
सबसे बड़ी परेशानी किसानों की है। इस समय धान मिंजाई का सीजन चल रहा है, लेकिन बिजली कटने से मिंजाई के बाद धान को साफ करने के लिए पंखे से उड़ाने की प्रक्रिया रुक रही है। किसान सवाल कर रहे हैं। जब लाइट ही नहीं रहेगी तो पंखा कैसे चलेगा, धान कैसे उड़ेगा? बिजली कटौती के कारण किसानों की पूरी कृषि प्रक्रिया ठप पड़ती जा रही है।
व्यापार और छोटे उद्योग भी बड़ी समस्या झेल रहे हैं। धान चक्की, वेल्डिंग, आटा मिल और अन्य ग्रामीण यूनिटों में काम रुकने से आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर बड़ी तकनीकी खराबी है तो विभाग को स्पष्ट कर कटौती घोषित करनी चाहिए, ताकि लोग अपनी योजना उसके अनुसार बना सकें, लेकिन स्थिति इसके उलट है। बिना किसी सूचना के रोज दिनभर आंख-मिचौली जारी है। सप्ताहभर से जारी इस स्थिति ने लोगों के भीतर आक्रोश पैदा कर दिया है।
किसानों ने यह भी बताया कि अभी छत्तीसगढ़ में धान बेचने की प्रक्रिया चल रही है, और समितियों में कंप्यूटर आधारित कार्यों के लिए बिजली जरूरी होती है, लेकिन कटौती के चलते आधा समय बिजली आने का इंतजार करते ही निकल जाता है, जिससे किसान, ऑपरेटर और समितियों के कर्मचारी सभी परेशान हैं।
ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा “एक तरफ सरकार बिजली बिल कम करने की बात करती है, और इधर बिजली बिल कम क्या, बिजली ही काट-काटकर कम कर दी गई है।”
लोगों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए, ताकि जनजीवन सामान्य हो सके। गांवों के नागरिकों का कहना है कि धैर्य अब जवाब दे रहा है, और यदि समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से विभाग के समक्ष अपनी आवाज और बुलंद करेंगे।
