
अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा वन मंडल में करोड़ों रुपए के गोदाम निर्माण घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में तत्कालीन और वर्तमान वन विभाग अधिकारियों पर शासकीय धन के गबन का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि फर्जी बिल और वाउचर के जरिए भुगतान किया गया, जबकि निर्माण कार्य न केवल अधूरा है बल्कि घटिया गुणवत्ता का भी है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने खोला घोटाले का पर्दाफाश
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. डी.के. सोनी ने इस घोटाले को उजागर करते हुए 2500 पन्नों की शिकायत के साथ कोतवाली थाना अम्बिकापुर में एफआईआर दर्ज कराने का आवेदन दिया है। उनके अनुसार, मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान किया गया, जिसमें एक ही व्यक्ति को लाखों रुपए का भुगतान दर्शाया गया है। इसके अलावा, निर्माण कार्य भी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया।
तेंदूपत्ता के बजाय रखा जा रहा पीडीएस का चावल
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि गोदाम का निर्माण तेंदूपत्ता रखने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन बिना किसी आधिकारिक अनुमति के उसमें पीडीएस का चावल भंडारित किया जा रहा है। यह न केवल घोटाले की गहराई को दर्शाता है, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को भी उजागर करता है।
पूर्व वन मंत्री के करीबी ठेकेदार पर संदेह
इस बड़े घोटाले में पूर्व वन मंत्री के करीबी ठेकेदार की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। आरटीआई कार्यकर्ता डी.के. सोनी ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस घोटाले की राशि लगभग 20 से 25 करोड़ रुपए तक हो सकती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
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